ऐसे भी पल आये जीवन में
अखिंयाँ रह गयी ठगी ठगी
मन अचरज से भर आया
तन लहराया गंध -सुगंध सा
जीवन उत्सव कहलाया
ऐसे भी पल आये जीवन में
मन उपवन -सा महकाया
दीप्त शिखा का उज्जवल
एक स्वप्न -सा उभर आया
मुक्त का सीपी से हो बंधन
ऐसा ही बंधन बंध आया
ऐसे भी पल आये जीवन में
हाथ जोड़ साथं माँगा था तुमने
पल दो पल का और हम?
हम जीवन ही अर्पित कर आये
अपनी एक ख्वाबों की दुनिया
दो गज जमीं में दफना आये
ऐसे भी पल आये जीवन में
आँगन गुंजन युक्त हुआ
हिंडोले अम्बुआ की डाली
सुर्ख चम्पई सांजशरमाई
हाथों में मेहँदी रच आई
ऐसे भी पल आये जीवन में
जीवन उत्सव कहलाया
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