Wednesday, January 27, 2010
में स्वाति शब्दों के मोती रचना चाहती हूँ .
विचारों की सीपियाँ तो अंतस में खुलती बंद होती ही रहती हें जाने कब कोई शब्द अनमोल मोती बनजाये.क्या शब्दों से अनमोल कुछ हे ?शब्दों के हीरे जवाहरात दिल के बंद कपाट खोल देते हे.महलों के खजाने खोल सकते हे.जीने की रह बदल देते हे जाने कितने मुरझाते कानों में अमृत गोल देते हें .ये शब्दों की अक्षत हम संजोयेंगे ये विश्वास हे मेरा .
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